अम्ल, क्षारक और संतुलन का जादू (The Magic of Acids, Bases, and Balance) By Praveen Kumar Sahu
विहान ने उत्साह के साथ अपनी विज्ञान की किताब का अगला अध्याय खोला—"अध्याय 2: अम्ल, क्षारक एवं लवण"। अभी उसने 'HCl' शब्द पर उंगली रखी ही थी कि पन्ने से नीली और लाल रोशनी की लपटें निकलने लगीं। अचानक, स्याही के बीच से किरन फिर से प्रकट हुआ, इस बार उसके हाथ में एक छोटा सा पारदर्शी कांच का चश्मा था। "नमस्ते विहान! तैयार हो दुनिया के स्वाद और स्वभाव को समझने के लिए?" किरन ने चहकते हुए पूछा।
विहान ने उत्साह के साथ अपनी विज्ञान की किताब का अगला अध्याय खोला—"अध्याय 2: अम्ल, क्षारक एवं लवण"। अभी उसने 'HCl' शब्द पर उंगली रखी ही थी कि पन्ने से नीली और लाल रोशनी की लपटें निकलने लगीं। अचानक, स्याही के बीच से किरन फिर से प्रकट हुआ, इस बार उसके हाथ में एक छोटा सा पारदर्शी कांच का चश्मा था। "नमस्ते विहान! तैयार हो दुनिया के स्वाद और स्वभाव को समझने के लिए?" किरन ने चहकते हुए पूछा।
किरन ने विहान को एक छोटा सा नीला कागज दिया। "यह लिटमस है," उसने समझाया। जैसे ही किरन ने एक नींबू की बूंद उस पर गिराई, वह कागज तुरंत गहरा लाल हो गया। "अम्ल (Acids) का स्वभाव यही है, विहान। वे स्वाद में खट्टे होते हैं और नीले लिटमस को लाल कर देते हैं। वे हाइड्रोजन आयन (H+) मुक्त करते हैं, जो उनमें बिजली की तरह ऊर्जा भर देते हैं।"

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