धातुओं की चमक और तत्वों का संसार (The Shine of Metals and the World of Elements) By Praveen Kumar Sahu

 धातुओं की चमक और तत्वों का संसार (The Shine of Metals and the World of Elements) By Praveen Kumar Sahu


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 विहान ने जैसे ही अपनी विज्ञान की किताब का तीसरा अध्याय खोला—"धातु एवं अधातु"—कमरे में एक तेज़ धात्विक गूँज सुनाई दी। तभी पन्ने के बीच से चांदी जैसी चमक वाली एक नन्ही आकृति बाहर निकली। "नमस्ते विहान! मैं 'अयास' हूँ, धातुओं का रक्षक," उसने अपनी धात्विक आवाज़ में कहा। विहान ने देखा कि अयास का शरीर किसी चमकदार लोहे की तरह चमक रहा था। "क्या तुम तैयार हो तत्वों की इस ठोस दुनिया को जानने के लिए?"


 अयास ने मेज पर रखे तांबे के लोटे पर हाथ फेरा। "देखो विहान, धातुओं की पहली पहचान है उनकी 'धात्विक चमक' (Lustre)।" फिर उसने विहान को एक छोटा सा चाकू दिया और सोडियम का एक टुकड़ा दिखाया। "ज़्यादातर धातुएं कठोर होती हैं, लेकिन सोडियम और पोटैशियम इतने नरम होते हैं कि इन्हें चाकू से भी काटा जा सकता है।" विहान ने जैसे ही सोडियम को काटा, उसे अंदर से वैसी ही चमक दिखाई दी।

 

 "धातुएं हार नहीं मानतीं," अयास ने एक छोटे से हथौड़े से सोने के टुकड़े को पीटना शुरू किया। देखते ही देखते वह एक पतली चादर में बदल गया। "इसे 'आघातवर्ध्यता' (Malleability) कहते हैं। और देखो!" अयास ने सोने को खींचकर एक बहुत लंबा और बारीक तार बना दिया। "सिर्फ 1 ग्राम सोने से 2 किलोमीटर लंबा तार बन सकता है! इसे 'तन्यता' (Ductility) कहते हैं।" विहान यह देखकर दंग रह गया।

 

 

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